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लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक शौचालय मड़नी गांव में लटक रहे ताले, खुले में शौच करने को मजबूर ग्रामवासी

गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए बना सामुदायिक शौचालय का गड्ढा हुआ ध्वस्त, केयर टेकर के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट

 

लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक शौचालय मड़नी गांव में लटक रहे ताले, खुले में शौच करने को मजबूर ग्रामवासी

गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए बना सामुदायिक शौचालय का गड्ढा हुआ ध्वस्त, केयर टेकर के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांटIMG 20251121 WA0017

पंकज चौबे सिद्धार्थनगर

बढ़नी- सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार सिद्धार्थ नगर जनपद को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है । जिसमें बढ़नी ब्लाक के करीब 77 ग्राम पंचायत भी शामिल हैं। जबकि सही तरीके से सामुदायिक शौचालयों की जांच की जाये तो बहुत ऐसे शौचालय हैं जहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है या फिर हमेशा ताले लटकते रहते हैं।

ताजा मामला ग्राम पंचायत मड़नी गांव का बताया जा रहा है। जहां ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त करने के लिए बना सामुदायिक शौचालय बदहाल हैं। लाखों खर्च के बाद भी ताले लटके हुए हैं। स्वयं सहायता समूहों को संचालन की जिम्मेदारी मिली है पर वे निष्क्रिय हैं। स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह शौचालय काफी दिनों से बंद पड़ा हुआ है। और यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं और जिम्मेदार अधिकारी भी इस मामले पर मौन धारण किये हुए हैं।
गांवों को खुले में शौच मुक्त कराने के उद्देश्य से सरकार ने सामुदायिक शौचालयों पर लाखों रुपये खर्च किए हैं। किंतु पंचायतों में सब कुछ इसके विपरीत ही दिख रहा है। लाखों की लागत से बने शौचालय निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। इनमें लगे ताले खोले जाने का इंतजार कर रहे हैं।
यहां लगा देसी नल पिछले एक वर्ष से खराब पड़ा है। यहां पानी की व्यवस्था न होने से ग्रामीण शौच के लिए नहीं आते हैं। शौचालय के बाहर चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। यहां बना शौचालय अव्यवस्था का शिकार है। मल गिरने वाली टंकी का ढक्कन टूटा हुआ है और व्यवस्था ध्वस्त नजर आ रहा है। यहां किस समूह को जिम्मेदारी दी गई है। कोई नहीं बता पा रहा है।
केयर टेकर घर बैठे हर महीने मानदेय लेती रहती है। दरवाजे पर लटकता ताला इस बात का प्रमाण है कि
क्षेत्र में लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय रात दिन बंद ही रहता है। इसे खोलने बंद करने वाले समूह द्वारा मात्र मानदेय लिया जा रहा है। ग्रामीण जब यहां शौच के लिए पहुंचते हैं, तो ताला ही लटकता रहता है। ग्रामीणों ने शौचालय संचालन की मांग भी की है।

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